दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा को राउज़ एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के 1 अप्रैल के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मिश्रा के खिलाफ जांच के निर्देश दिए गए थे। यह आदेश मोहम्मद इलियास की याचिका पर पारित किया गया था, जिसमें उन्होंने दंगों के दौरान कपिल मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।
याचिका में इलियास ने दावा किया कि उन्होंने कर्दमपुरी इलाके में सड़क रोकते और ठेले तोड़ते हुए कपिल मिश्रा को देखा। याचिका में यह भी कहा गया कि तत्कालीन दिल्ली पुलिस के डीसीपी मिश्रा के बगल में खड़े थे। एसीजेएम वैभव चौरसिया ने अपने आदेश में दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस के सिद्धांत में कई संदिग्ध धारणाएं और अनुमान शामिल थे।
मजिस्ट्रेट ने यह भी कहा कि सीएए विरोधी प्रदर्शन स्वाभाविक नहीं थे, बल्कि हिंसा भड़काने का दिखावा था। उन्होंने अभियोजन पक्ष के तथ्यों और पुलिस की व्याख्याओं को गलत ठहराया। इसके अलावा मजिस्ट्रेट ने महिलाओं को प्रदर्शन में रखने की पुलिस की व्याख्या पर भी सवाल उठाए।
कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस ने इस आदेश को सत्र न्यायालय में चुनौती दी। 9 अप्रैल को कोर्ट ने जांच पर रोक लगा दी थी और आज सत्र न्यायालय ने आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया। राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने यह निर्णय सुनाया।
इस तरह अब कपिल मिश्रा के खिलाफ इस मामले में जांच का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ा हुआ है और यह फैसला कानून और प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
REPORTER: DIVYA MEHTA
EDITOR: SHIVAM PRAJAPATI
