सुप्रीम कोर्ट ने जून में अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे में पायलट-इन-कमांड रहे दिवंगत कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता द्वारा दायर याचिका पर केंद्र, डीजीसीए और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। सभरवाल इस हादसे की निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत जांच की मांग कर रहे थे। इस हादसे में 260 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हादसा हुआ, लेकिन पायलट के पिता को यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि उनके बेटे को दोषी ठहराया जा रहा है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि भारत में किसी भी पक्ष का मानना नहीं है कि यह पायलट की गलती थी।
याचिका की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची की बेंच ने की। याचिकाकर्ता के वकील सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उनकी उम्र 91 साल है और जांच स्वतंत्र नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बोइंग विमानों में तकनीकी समस्याओं की खबरें आई हैं और यह मामला एक्सिडेंट है, इंसिडेंट नहीं।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह दुर्घटना दुखद है, लेकिन पायलट के पिता पर यह आरोप का बोझ नहीं होना चाहिए। जस्टिस बागची ने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट में पायलट पर कोई आरोप या इशारा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी अन्य पायलट ने फ्यूल कट-ऑफ के बारे में पूछा था, जिस पर जवाब नकारात्मक था।
वकील ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें पायलट की गलती का इशारा था। जस्टिस बागची ने कहा कि विदेशी रिपोर्ट्स पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। जस्टिस सूर्यकांत ने इसे गलत रिपोर्टिंग बताया और कहा कि भारत में कोई भी यह नहीं मानता कि हादसे में पायलट की गलती थी।
REPORTER: DIVYA MEHTA
EDITOR: SHIVAM PRAJAPATI
